Janam Se Banjara Hoon Bandhu

जनम से बंजारा हूँ बंधू
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जनम से बंजारा हूँ बंधू, जनम जनम बंजारा
कही कोई घर न घाट न अंगनारा

जहाँ कही ठहर गया दिल, हमने डाले डेरे
रात कही नमकीन मिली तो मीठे सांझ सवेरे
कभी नगरी छोड़ी, साहिल छोड़ा, लिया मंझधारा

सोच ने जब करवट बदली, शौक ने पर फैलाये
मैंने आशियाँ के तिनके सारे डाल से उड़ाए
कभी रिश्ते तोड़े, नाते तोड़े, छोड़ा कुल किनारा