Jahan Pe Savera Ho

जहाँ पे सवेरा हो बसेरा वहीं है
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कभी पास बैठो, किसी फूल के पास
सुनो जब ये महकता है, बहोत कुछ ये कहता है
हो कभी गुनगुनाके, कभी मुस्कुराके
कभी चुपके चुपके, कभी खिलखिलाके
जहाँ पे सवेरा हो बसेरा वहीं है

कभी छोटे छोटे शबनम के कतरे
देखे तो होंगे सुबह और सवेरे
ये नन्ही सी आँखें जागी है शब भर
बहोत कुछ है दिल मैं बस इतना है लब पर
जहाँ पे सवेरा हो बसेरा वहीं है

ना मिटटी ना गारा, ना सोना सजाना
जहाँ प्यार देखो वहीं घर बनाना
ये दिल की इमारत बनती है दिल से
दिलासा को छू के उम्मीदों स मिलके
जहाँ पे बसेरा हो सवेरा वहीं है