दिन सारा गुज़ारा तोरे अंगना
अब जाने दे मुझे मोरे सजना
मेरे यार शब-ब-ख़ैर
आसान है जाना महफ़िल से
कैसे जाओगे निकल कर दिल से
मेरे यार शब-ब-ख़ैर
ओ दिलबर दिल तो कहे, तेरी राहोंको रोक लूँ मैं
आई बिरहा की रात अब बतला दे क्या करूँ में
याद आयेंगी ये बातें तुम्हारी, तड़पेगी मोहब्बत हमारी
मैं धरती तू आसमान, मेरी हस्ती पे छा गया तू
सीने के सुर्ख़ बाग़ में दिल बनके आ गया तू
अब रहने दे निगाहो में मस्ती
ओ बसा ली मैंने ख्वाबों की बस्ती
ये चंचल ये हसीन रात हाय काश आज ना आती
हर दिन के बाद रात है, एक दिन तो ठहर जाती
कोई हम से बिछड़ के ना जाता
जीने का मज़ा आ जाता
मेरे यार शब-ब-ख़ैर