बहता है मन कहीं
कहाँ जानती नहीं
कोई रोक ले यहीं
भागे रे मन कहीं आगे रे मन
चला जाने किधर जानूँ ना
चले ठंडी हवा
संग मन भी गया
ढूँढूं मैं कहाँ उसको
बतलाये कोई मुझको
की हाँ हाँ हाँ रे
भागे रे मन कहीं आगे रे मन
चला जाने किधर जानूँ ना
हाय ऐसा समा
फिर होगा कहाँ
जी लूँ मैं इसे खुलके
सावन में जरा खुलके
अरे सुन सुन सुन
भागे रे मन कहीं आगे रे मन
चला जाने किधर जानूँ ना