Bas Ek Chup Si Lagi Hai

बस एक चुप सी लगी है
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बस एक चुप सी लगी है
नहीं उदास नहीं
कहीं पे सांस रुकी है
नहीं उदास नहीं

कोई अनोखी नहीं ऐसी ज़िन्दगी लेकिन
खूब ना हो
मिली जो खूब मिली है, नहीं उदास नहीं

सहर भी ये रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन
हम ही ने शाम चुनी है, नहीं उदास नहीं

वो दास्तां जो हमने कही भी, हमने लिखी
आज वो खुद से सुनी है, नहीं उदास नहीं