आज किसी के हाथों ने दिल के तारों को छेड़ दिया
गहरी नींद में सोये साज़ की झंकारों को छेड़ दिया
आज मेरी तनहाई अपने आपसे भी शरमाने लगी
दिल की धड़कन नगमा बनकर होठोंपर लहराने लगी
जो साहिल को साथ बहा ले उन धारों को छेड़ दिया
हर झोंके से मुझको उनके सांस की खुशबू आती है
तन मन में एक ठंडी ठंडी आग बिखरती जाती है
जाने किसकी शोख नज़र ने अंगारों को छेड़ दिया